Monday, March 2, 2026
Banner Top

राज्य हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में प्रदेशभर में जारी 93 बजरी खनन पट्टों को समाप्त कर दिया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि ये लीज नियमों और पर्यावरणीय मानकों के खिलाफ जाकर जारी की गई थीं। कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी सवाल किया कि यदि बड़े पैमाने पर बजरी खनन की अनुमति दी गई थी, तो नदियों और प्राकृतिक संसाधनों में बजरी का पुनर्भरण (री-प्लेनिशमेंट) कैसे और कब किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि अवैध और अनियंत्रित बजरी खनन से नदियों का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो रहा है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है। साथ ही भूजल स्तर पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बिना वैज्ञानिक अध्ययन और पर्यावरणीय स्वीकृति के लीज देना कानून का उल्लंघन है।
अदालत ने राज्य सरकार को भविष्य में बजरी खनन से पहले स्पष्ट नीति, वैज्ञानिक सर्वे और पुनर्भरण योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद प्रदेश में बजरी कारोबार से जुड़े ठेकेदारों में हलचल मच गई है, वहीं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों ने फैसले का स्वागत किया है।
यह निर्णय आने वाले समय में खनन नीति को और सख्त बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

0 Comments

Leave a Comment

Archives

<div id="slider-posts-1" class="widget fnwp-widget flownews_widget fnwp_slider_posts"> <h3 class="widget-title"><span class="fnwp-title-widget">Popular Posts</span></h3> </div>