राजस्थान हाईकोर्ट के एक अहम फैसले ने प्रदेश के 50 से ज्यादा निजी स्कूलों की चिंता बढ़ा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्री-प्राइमरी कक्षाओं में भी अब ‘राइट टू एजुकेशन (RTE)’ कानून के तहत बच्चों को प्रवेश देना अनिवार्य होगा। इस फैसले को शिक्षा के अधिकार के दायरे को और मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।
अब तक कई निजी स्कूल यह तर्क देते रहे थे कि आरटीई केवल पहली कक्षा से लागू होता है और नर्सरी या केजी कक्षाएं इसके अंतर्गत नहीं आतीं। लेकिन हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शिक्षा का अधिकार केवल औपचारिक स्कूली शिक्षा तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि प्रारंभिक शिक्षा भी इसका अहम हिस्सा है। कोर्ट ने माना कि प्री-प्राइमरी स्तर पर शिक्षा बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए बेहद जरूरी है।
इस फैसले के बाद राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को भी नई गाइडलाइंस जारी करनी होंगी। वहीं, निजी स्कूलों को अपनी प्रवेश नीति में बदलाव करना पड़ेगा। अभिभावकों ने इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए बड़ी राहत बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शिक्षा में समानता को बढ़ावा मिलेगा।





