बिहार विधानसभा चुनाव 2025 ने कई राजनीतिक समीकरण बदल दिए और सबसे बड़ा उलटफेर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। योगी आदित्यनाथ ने चुनाव प्रचार में उतरकर न सिर्फ भाजपा और एनडीए के पक्ष में हवा बनाई बल्कि सामाजिक समीकरण के महारथी माने जाने वाले लालू प्रसाद यादव की राजनीति को भी चुनौती दे दी। दानापुर सीट पर हुई सीधी टक्कर ने चुनाव को और रोचक बना दिया। लालू यादव बीमारी के बावजूद अपने उम्मीदवार रीतलाल राय के समर्थन में मैदान में उतरे, लेकिन योगी की रैलियों ने माहौल बदल दिया। दानापुर में जमा भीड़ और हिंदुत्व आधारित भाषणों ने जातीय गोलबंदी को कमजोर कर दिया। शुरुआती रुझानों में रीतलाल राय आगे थे, लेकिन शहरी क्षेत्रों की ईवीएम खुलने के बाद रामकृपाल यादव ने बढ़त बना ली और अंत में जीत दर्ज की। योगी आदित्यनाथ ने कुल 31 रैलियां कीं, जिनमें से 27 सीटों पर एनडीए को जीत मिली, उनके प्रचार का स्ट्राइक रेट 87% रहा। इसके विपरीत अखिलेश यादव और लालू यादव का प्रभाव बेहद सीमित रहा। लालू यादव ने तीन सीटों पर सक्रिय प्रचार किया, लेकिन सभी जगह हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया कि योगी का प्रभाव बिहार की राजनीति पर गहरा पड़ा है और लालू यादव का जातीय समीकरण इस बार पूरी तरह फेल हो गया।





