Saturday, February 7, 2026
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बीकानेर में खेजड़ी वृक्षों को बचाने की मांग को लेकर चल रहा महापड़ाव लगातार तेज होता जा रहा है। कड़ाके की सर्दी और गिरते तापमान के बावजूद अनशनकारी और प्रदर्शनकारी अपने संकल्प पर अडिग नजर आ रहे हैं। इस आंदोलन में अब तक 450 से अधिक पर्यावरण प्रेमी, संत, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण शामिल हो चुके हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और सामाजिक पहचान है। खेजड़ी के कटान से न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि पशुपालन और ग्रामीण आजीविका भी प्रभावित होगी। आंदोलन स्थल पर भजन, प्रवचन और शांतिपूर्ण धरना लगातार जारी है।

संतों और पर्यावरणविदों ने सरकार से खेजड़ी कटान पर तत्काल रोक लगाने और इसे संरक्षित वृक्ष घोषित करने की मांग की है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक महापड़ाव और अनशन जारी रहेगा।

प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने से आंदोलन और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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