राजस्थान के जालोर जिले में उपभोक्ता अदालत ने बीमा कंपनियों के लिए एक अहम और नज़ीर बनने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने कोरोना से हुई मृत्यु के बीमा क्लेम को गलत तरीके से रोकने के मामले में बीमा कंपनी को 10 लाख रुपये का भुगतान करने के
निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मानसिक वेदना और परिवाद खर्च के लिए अतिरिक्त राशि जमा कराने का आदेश भी दिया गया है।
मामले के अनुसार, मृतक के परिजनों ने कोरोना संक्रमण से हुई मृत्यु के बाद बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया था। सभी आवश्यक दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करने के बावजूद बीमा कंपनी ने क्लेम यह कहकर खारिज कर दिया कि कोरोना से मृत्यु पॉलिसी की शर्तों में शामिल नहीं है।
उपभोक्ता फोरम ने इसे सेवा में गंभीर कमी मानते हुए बीमा कंपनी को दोषी ठहराया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि महामारी के दौरान कोरोना मृत्यु को लेकर उपभोक्ताओं के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। न्यायालय के अनुसार, बीमा कंपनियां मनमाने ढंग से क्लेम अस्वीकार नहीं कर सकतीं।
इस फैसले से न केवल पीड़ित परिवार को राहत मिली है, बल्कि यह निर्णय भविष्य में कोरोना या अन्य आपदा से जुड़े बीमा विवादों में उपभोक्ताओं के लिए मजबूत आधार बनेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बीमा कंपनियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम है।





