राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का काफिला उस समय विवादों में आ गया, जब गोरक्षकों ने कोटा–चित्तौड़ हाईवे पर उनका काफिला रोक दिया। गोरक्षकों का आरोप था कि इलाके में मृत गायों को खुले में फेंक दिया गया, जिससे उनमें भारी नाराजगी है। इस घटना के चलते हाईवे पर कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बन गई और यातायात प्रभावित हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गोरक्षकों ने सड़क पर प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और मृत पशुओं के उचित निस्तारण की मांग की। उनका कहना था कि यह न केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया।
काफिला रुकने की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि मृत पशुओं के निस्तारण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई और वसुंधरा राजे का काफिला आगे रवाना हो सका।
इस घटना के बाद क्षेत्र में राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे प्रशासनिक विफलता बताया, जबकि भाजपा नेताओं ने कहा कि संवेदनशील मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई जरूरी है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और जाम की स्थिति को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।





