खेजड़ी आंदोलन को समाप्त कराने के लिए पहुंचे मंत्रियों के सामने उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब आंदोलन स्थल पर बैठे एक
अनशनकारी की अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया। मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया और तुरंत चिकित्सा सहायता के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को बुलाया गया। इस घटना के बाद आंदोलन स्थल पर माहौल और अधिक भावुक हो गया। आंदोलनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक सरकार की ओर से उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक अनशन समाप्त करने का सवाल ही नहीं उठता। उनका कहना है कि पहले भी मौखिक भरोसे दिए गए, लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ, इसलिए अब वे केवल लिखित आश्वासन ही स्वीकार करेंगे। मंत्रियों ने आंदोलनकारियों से बातचीत कर स्थिति को संभालने की कोशिश की और उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का भरोसा दिलाया। वहीं आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए नजर आए। खेजड़ी आंदोलन से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय से क्षेत्र में असंतोष बना हुआ है और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आंदोलन उनके अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है। अनशनकारी के बेहोश होने की घटना ने प्रशासन और सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया है।





