प्रदेश में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। औद्योगिक गतिविधियों, वाहनों से निकलने वाले धुएं, निर्माण कार्यों और खुले में कचरा जलाने जैसी वजहों से हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीते तीन वर्षों में प्रदूषण फैलाने वालों पर 5.99 लाख चालान काटे गए, जिनसे करीब 16 करोड़ रुपए की वसूली की गई है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट बताती है कि शहरों के साथ-साथ अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी वायु प्रदूषण का स्तर चिंता बढ़ा रहा है। विशेषकर सर्दियों के मौसम में पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे प्रदूषक तय मानकों से कहीं अधिक दर्ज किए गए हैं। बढ़ता प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रहा है, जिससे सांस, आंखों में जलन और एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
प्रशासन की ओर से प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सख्ती बरती जा रही है। वाहनों की जांच, औद्योगिक इकाइयों की मॉनिटरिंग और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। बावजूद इसके, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चालान ही नहीं, बल्कि जन-जागरूकता और पर्यावरण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी भी जरूरी है।





