नई दिल्ली गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत ने कूटनीतिक मोर्चे पर बड़ा दांव चल दिया है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। 26 जनवरी के अगले ही दिन 16वां भारत–यूरोपीय संघ (EU) शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इस अहम बैठक में भारत और EU के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने पर जोर रहेगा। माना जा रहा है कि भारत की इस सक्रिय कूटनीति से ISI और खालिस्तानी संगठनों में बेचैनी बढ़ गई है।
शिखर सम्मेलन में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने, रक्षा सहयोग को विस्तार देने, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। खासतौर पर आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ सहयोग बढ़ाने का एजेंडा उन ताकतों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है, जो भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रही हैं।
EU के साथ भारत की नजदीकी न सिर्फ आर्थिक मोर्चे पर फायदेमंद मानी जा रही है, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा संतुलन में भी भारत की भूमिका को मजबूत करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मेलन भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। गणतंत्र दिवस के आसपास इस शिखर सम्मेलन का आयोजन भारत की रणनीतिक टाइमिंग को भी दर्शाता है।





