प्रदेश में गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। हाल ही में एक बैठक के दौरान एक विधायक ने अधिकारियों द्वारा दिए गए पत्र को वहीं फाड़कर साहब के मुंह पर फेंक दिया। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया और मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।
बताया जा रहा है कि SIR के आंकड़ों को लेकर गंभीर असंतोष जताया गया। विधायक का आरोप था कि पुनरीक्षण में बड़ी संख्या में नाम गलत तरीके से जोड़े या हटाए गए हैं। इसी बीच कलेक्टर टीना डाबी भी आंकड़ों की विसंगतियों को लेकर सवालों के घेरे में आ गईं। बैठक में जब आंकड़ों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिला तो माहौल तनावपूर्ण हो गया।
विवाद बढ़ने पर संबंधित SDM ने कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट “अल्टीमेटम” दे दिया। SDM ने निर्देश दिए कि तय समयसीमा में SIR से जुड़ी सभी खामियों को दूर किया जाए, अन्यथा जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर SIR की पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीति के हस्तक्षेप पर बहस छेड़ दी है। विपक्ष ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, वहीं प्रशासन स्थिति संभालने में जुटा हुआ है।





