Thursday, January 15, 2026
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इंडिगो एयरलाइंस में हाल ही में आई फ्लाइट कैंसिलेशन की बड़ी समस्या अब गंभीर विवाद का रूप ले चुकी है। एयरलाइन पायलट्स असोसिएशन ऑफ इंडिया (ALPA) और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने सरकार द्वारा दी गई राहत पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा से समझौता है। दोनों संस्थाओं का आरोप है कि इंडिगो ने नए नियमों को कमजोर करने और सरकार पर दबाव बनाने के लिए यह संकट जानबूझकर खड़ा किया। उन्होंने पूछा कि जब 1 नवंबर से नए नियम लागू थे तो दिसंबर में अचानक ऐसी स्थिति क्यों बनी। ALPA अध्यक्ष कैप्टन सैम थॉमस ने DGCA को लिखे पत्र में कहा कि इंडिगो को मिली छूट बेहद गंभीर है और इसके पीछे एयरलाइन की रणनीति साफ दिखाई देती है।

इधर विशेषज्ञों का कहना है कि इंडिगो की 64% बाजार हिस्सेदारी उसे एक ऐसी स्थिति में रखती है जहाँ वह पूरे विमानन सिस्टम को प्रभावित कर सकती है। संसद में भी इंडिगो की इस कथित ‘मोनॉपली’ पर सवाल उठे हैं और सरकार के मॉडल को जिम्मेदार ठहराया गया है। देश की विमानन छवि को लेकर भी चिंता बढ़ गई है, क्योंकि DGCA के कदम पीछे खींचने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश गया कि भारत के नियम बड़े खिलाड़ियों के दबाव में बदल सकते हैं। इस पूरे विवाद ने न सिर्फ इंडिगो बल्कि पूरे भारतीय एविएशन सेक्टर की साख को चुनौती दी है।

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