राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि विभाग ने न्यायालय के आदेश की खुलेआम अवहेलना की है। मामला एक सीओ के तबादले से जुड़ा है, जिसमें कोर्ट ने पहले ही स्टे आदेश जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस प्रशासन ने अधिकारी का ट्रांसफर कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि स्टे आदेश के बाद कोई भी तबादला न केवल गैरकानूनी है बल्कि यह प्रशासनिक मनमानी का उदाहरण है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। जस्टिस ने राज्य सरकार के अधिकारियों से पूछा कि न्यायिक आदेशों के रहते हुए भी ऐसी कार्रवाई क्यों की गई और किस आधार पर स्टे को नजरअंदाज किया गया। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पुलिस विभाग को कानून का पालन कराने की जिम्मेदारी दी जाती है, लेकिन यदि वही विभाग आदेशों की अवहेलना करे तो इससे शासन और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से पूर्व स्थिति में बहाल किया जाए और भविष्य में इस तरह की मनमानी से बचने के लिए विभागीय स्तर पर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएं। अदालत ने यह भी कहा कि यदि आदेशों की अनदेखी दोबारा की गई तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी।





