दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार विस्फोट को सरकार ने आतंकी हमला करार दिया है। जांच में खुलासा हुआ कि डॉ. उमर नबी ने 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर बड़ा धमाका करने की योजना बनाई थी। बताया जा रहा है कि उमर ने 2021 में तुर्की यात्रा के दौरान जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों से मुलाकात की थी, जिसके बाद वह कट्टरपंथ की ओर झुक गया। उमर और उसके साथी डॉ. मुजम्मिल गनी ने अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर जैसे विस्फोटक इकट्ठा किए और अल फलाह विश्वविद्यालय परिसर के आसपास इन्हें जमा किया। हालांकि, 10 नवंबर को हुए अचानक विस्फोट ने इस बड़ी साजिश को विफल कर दिया। जांच एजेंसियों ने बताया कि उमर ने हमले से पहले मस्जिद में शरण ली थी और वहीं से कार लेकर निकला था। फोरेंसिक जांच में विस्फोटक के अवशेषों की पुष्टि के लिए 200 से अधिक नमूने एकत्र किए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि उमर और गनी तुर्की से लौटने के बाद टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए पाकिस्तान स्थित हैंडलर से संपर्क में थे, जिन्होंने उन्हें भारत के विभिन्न हिस्सों में फैलने के निर्देश दिए थे। फिलहाल सीबीआई, एनआईए और एफएसएल की टीमें मिलकर इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं।





