राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित सोडाला के वैकुंठनाथ मंदिर में कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी के पावन अवसर पर भक्तों का तांता लगा हुआ
है। बैकुंठ चतुर्दशी पर्व को भगवान विष्णु और भगवान शिव के हरि-हर मिलन का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु स्वयं अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं और द्वारपाल नंदी वैकुंठ के द्वार खोल देते हैं।
कहा जाता है कि इस दिन यदि श्रद्धा से केवल एक परिक्रमा वैकुंठनाथ मंदिर की की जाए, तो भगवान विष्णु भक्त की सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं। मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। वैकुंठ चतुर्दशी का यह पर्व मोक्ष प्राप्ति का दिन माना गया है। जयपुर के सोडाला क्षेत्र में स्थित यह मंदिर धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, दीपदान और विष्णु सहस्रनाम के पाठ का आयोजन किया गया है। भक्तों का विश्वास है कि इस पावन दिन पर भगवान विष्णु और शिव दोनों की उपासना करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।





