चार दिवसीय छठ महापर्व शनिवार से प्रारंभ हो गया है। इस वर्ष छठ पर्व का शुभ आरंभ अनुराधा नक्षत्र और शोभन योग में नहाय-खाय के
साथ होगा। व्रती गंगा नदी या अन्य पवित्र जलाशयों में स्नान करेंगे और भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करेंगे। इसके बाद व्रती स्वयं के लिए नहाय-खाय प्रसाद तैयार करेंगे, जिसे वे भगवान का भोग अर्पित कर ग्रहण करेंगे।
छठ के प्रसाद में अरवा चावल, चना दाल, कद्दू की सब्जी और आंवले की चटनी प्रमुख रूप से शामिल हैं। व्रती पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इन सामग्रियों को तैयार करेंगे। पर्व के दौरान व्रतियों का विशेष ध्यान पवित्रता और संयम पर होता है। नहाय-खाय के दिन व्रती शरीर और मन से शुद्ध होकर पर्व की शुरुआत करते हैं।
छठ महापर्व खासकर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। चार दिवसीय इस पर्व में मुख्यतः पहला दिन नहाय-खाय, दूसरा दिन काढ़ा और पूजन, तीसरा दिन संध्या अर्घ्य और चौथा दिन भोर अर्घ्य का होता है। व्रती सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। छठ पर्व में भक्तों का सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन भी जुड़ा होता है, जहां सामुदायिक सहयोग और धार्मिक उत्साह को बढ़ावा मिलता है। इस वर्ष भी भक्तों ने बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ छठ पर्व की तैयारी कर ली है।





