राजस्थान के जलस्रोत और बांध लगातार अतिक्रमण और लापरवाही के कारण क्षतिग्रस्त होते जा रहे हैं। जयपुर का रामगढ़ बांध और प्रदेश के
कई तालाब, नदियां और जोहड़ पिछले 70 साल में अतिक्रमण की वजह से दम तोड़ चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट ने समय-समय पर निर्देश दिए कि इन जलस्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कर वर्ष 1955 की स्थिति में लाया जाए, लेकिन अधिकारियों ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए।
अधिकारी बुलडोजर अभियान चलाने के बजाय केवल प्लान बनाने तक ही सीमित रहे। इसी कारण जलस्रोतों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। अजमेर की आनासागर और जयपुर की मानसागर झील में भी नियम विरुद्ध निर्माण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा। पिछले वर्षों में जनहित याचिकाओं के माध्यम से अधिकारियों को अतिक्रमण हटाने और जलस्रोत संरक्षित करने के निर्देश दिए गए, लेकिन उनका पालन अधूरा रहा।
विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का कहना है कि अगर जलस्रोतों को अतिक्रमण मुक्त नहीं किया गया तो भविष्य में पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसलिए तत्काल प्रभावी कदम उठाकर जलस्रोतों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करना जरूरी है।





