Monday, March 2, 2026
Banner Top

जयपुर में दशहरे से पहले हुई मूसलाधार बारिश ने कारीगरों की मेहनत और उत्साह पर पानी फेर दिया। मानसरोवर, गुर्जर की थड़ी और अन्य इलाकों में महीनों की मेहनत से बनाए गए रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले बारिश में भीगकर बर्बाद हो गए। इस घटना ने न केवल कारीगरों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बना बल्कि उनके परिवारों की रोजी-रोटी पर भी संकट डाल दिया। दो महीने की थकान और मेहनत पानी में बह गई और दशहरे की खुशियों पर साया डाल दिया। कारीगर सोहन गुजराती ने कहा कि यदि स्थानीय प्रशासन उनके लिए शेड या सुरक्षित जगह की व्यवस्था कर देता तो नुकसान टाला जा सकता था। वे बताते हैं कि साल भर यही काम उनका जीवन-यापन का जरिया है, और बारिश से हुए नुकसान की कोई भरपाई नहीं है। इस आपदा का असर आयोजकों पर भी पड़ा है। शहर के 400 से अधिक आयोजक बड़े पैमाने पर रावण दहन की तैयारी कर रहे थे, लेकिन पुतलों के खराब हो जाने से दशहरा कार्यक्रम अधूरा रह गया। भीड़भाड़ और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मोहल्लों और पार्कों में की गई तैयारी अब प्रभावित हुई है। यह घटना दिखाती है कि मौसम की अचानक तबाही किस तरह से सांस्कृतिक उत्सव और आमजन की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकती है।

0 Comments

Leave a Comment

Archives

<div id="slider-posts-1" class="widget fnwp-widget flownews_widget fnwp_slider_posts"> <h3 class="widget-title"><span class="fnwp-title-widget">Popular Posts</span></h3> </div>