चुनाव से पहले बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO की हालात लगातार चिंता का विषय बनती जा रही है। कई जिलों से रिपोर्ट सामने आई है कि BLO रोजाना 16 घंटे तक ड्यूटी कर रहे हैं और उन्हें मात्र 5 घंटे ही सोने का समय मिल पा रहा है। थकान और शारीरिक दर्द के बावजूद ये कर्मचारी घर–घर जाकर मतदाता सूची के काम में जुटे हुए हैं। कुछ BLO तो गंभीर बीमारियों से जूझते हुए भी फील्ड में काम करने को मजबूर हैं। पथरी का हाल ही में ऑपरेशन करवाने वाले एक BLO ने बताया कि डॉक्टरों ने आराम की सलाह दी थी, लेकिन वह लगातार क्षेत्र में लोगों से मिलकर फॉर्म भरवा रहे हैं। वहीं, एक अन्य BLO की कुछ समय पहले सड़क दुर्घटना में पसलियाँ फ्रैक्चर हो गई थीं, इसके बावजूद वे बिना शिकायत काम संभाल रहे हैं।
इन हालातों ने चुनावी व्यवस्था की वास्तविक चुनौतियों को उजागर किया है। BLO ही वो कर्मचारी हैं जो सीधे मतदाताओं तक पहुंचते हैं और पूरी प्रक्रिया को सही दिशा देते हैं। अत्यधिक कार्यभार और लंबी ड्यूटी के कारण उनकी सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। कई BLO ने बताया कि दिनभर फील्ड में घूमना, शाम को रजिस्ट्रेशन और डेटा अपडेट करना, फिर रात को रिपोर्टिंग करना उनकी दिनचर्या बन चुकी है। इसके बावजूद वे यह उम्मीद करते हैं कि प्रशासन उनके लिए बेहतर व्यवस्थाएँ और सुविधाएँ उपलब्ध कराएगा ताकि वे अपने काम को सुचारू तरीके से निभा सकें।





