देश में बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए रोड सेफ्टी और ट्रॉमा मैनेजमेंट प्रोग्राम्स से जुड़े विशेषज्ञों ने बड़ी अपील जारी की है। उनका कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि समाज के हर व्यक्ति को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। विशेषज्ञों ने बताया कि सड़क हादसों में हर साल लाखों लोग अपनी जान गंवाते हैं और उतने ही गंभीर रूप से घायल होते हैं। ऐसे हादसों को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाना, यातायात नियमों का पालन, और आपात स्थिति में तुरंत राहत उपलब्ध करवाना बेहद जरूरी है।
कार्यक्रमों के दौरान ट्रॉमा मैनेजमेंट टीमों ने कहा कि सड़क हादसों में घायल व्यक्ति को ‘गोल्डन आवर’ के भीतर सही उपचार मिलना जीवन बचाने में सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है। इसलिए लोगों को फर्स्ट-एड की बुनियादी जानकारी दी जानी चाहिए और इस ज्ञान को स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक कार्यक्रमों में भी फैलाया जाना चाहिए। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि हेलमेट, सीट बेल्ट और स्पीड लिमिट जैसे नियमों की अनदेखी हादसों का सबसे बड़ा कारण हैं।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य सड़क सुरक्षा संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है, ताकि लोग अपनी और दूसरों की सुरक्षा के प्रति अधिक जिम्मेदार बनें। जागरूकता के माध्यम से सड़क हादसों में कमी लाना ही इन अभियानों का मुख्य लक्ष्य है।





