भ्रष्टाचार के कथित मामले में सरकार द्वारा दर्ज कराए गए मामलों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार सरकार
ने कुल आठ सोसायटी के खिलाफ अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप में केस दर्ज कराया था। जांच के बाद पुलिस ने इनमें से सात मामलों में अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगा दी है, जिससे इन मामलों में आगे की कार्रवाई लगभग समाप्त मानी जा रही है। केवल एक मामला अभी जांच के दायरे में है, जिस पर विस्तृत पड़ताल जारी है।
विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं सरकार का कहना है कि पुलिस ने तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की है और जहां पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले, वहां एफआर लगाना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। इस मामले ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जांच प्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब निगाहें शेष बचे मामले की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे आगे की दिशा तय होगी।





