जयपुर में 18 साल पुराने एक बाल उत्पीड़न मामले में आखिरकार न्याय मिला है। इस केस में पीड़ित युवक ने लंबे समय तक चुप्पी साधी थी, लेकिन हिम्मत जुटाकर उसने अदालत में अपनी आपबीती सुनाई। अदालत ने सबूतों और गवाही के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया और सजा सुनाई। यह मामला तब का है जब पीड़ित मात्र 8 वर्ष का था और आरोपी उसके पड़ोस में रहने वाला व्यक्ति था।
पीड़ित ने बताया कि उस घटना के बाद वह मानसिक रूप से टूट गया था और कई वर्षों तक डर के साये में जीता रहा। जब वह बड़ा हुआ तो उसने न्याय पाने का साहस किया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। सुनवाई के दौरान आरोपी पूरी तरह बेखौफ नजर आया, लेकिन कोर्ट ने उसकी हर चाल को समझ लिया। इस फैसले के बाद पीड़ित और उसके परिवार ने राहत की सांस ली। अदालत ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए कहा कि ऐसे मामलों में देरी होने पर भी न्याय जरूर मिलना चाहिए। यह फैसला समाज में उन सभी पीड़ितों के लिए प्रेरणा है जो वर्षों से चुप हैं। न्याय में देर हो सकती है, लेकिन अंधकार के बाद प्रकाश जरूर आता है।





