Thursday, January 15, 2026
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जयपुर की घाट की गुणी टनल में हुए हादसे ने एक बार फिर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नाबालिग योगेश की मौत सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था, निगरानी और पारिवारिक जिम्मेदारी की संयुक्त चूक का उदाहरण बन गई है। टनल में दोपहिया वाहनों का प्रवेश पहले से ही प्रतिबंधित है, बावजूद इसके नाबालिग का बाइक लेकर अंदर पहुंच जाना ट्रैफिक सिस्टम की कमजोरी को उजागर करता है। पुलिस भी मानती है कि कई युवक बार-बार रोकने के बावजूद टनल में घुस जाते हैं, लेकिन रोकथाम व्यवस्था मजबूत न होने से ऐसी घटनाएं दोहराई जाती हैं। परिवहन विभाग की भूमिका भी सवालों में है, क्योंकि सड़क पर नाबालिगों की तेज रफ्तार आम हो चुकी है, जबकि लाइसेंस 18 वर्ष से कम उम्र में जारी ही नहीं होते। आरटीओ द्वारा चलाए जाने वाले अभियानों का असर जमीनी स्तर पर नजर नहीं आता, जिससे नाबालिगों में न डर न रोक दिखती है।

सबसे बड़ा प्रश्न अभिभावकों की जिम्मेदारी को लेकर उठता है, क्योंकि वाहन घर से ही मिलता है। बच्चों की जिद और सोशल मीडिया पर स्टंट वीडियो का आकर्षण कई बार परिवार की नजरों के सामने होता है, फिर भी रोकथाम नहीं की जाती। अधिकारी मानते हैं कि नाबालिग का वाहन चलाना स्पष्ट अपराध है और समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन असली बदलाव तभी आएगा जब परिवार और सिस्टम दोनों अपनी भूमिका गंभीरता से निभाएंगे।

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