देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है, जिसका सीधा असर हजारों यात्रियों पर पड़ा। नए FDTL नियमों के तहत तैयारी पूरी न होने के कारण कई फ्लाइट्स में देरी और अव्यवस्था देखने को मिली। DGCA के रिटायर्ड जॉइंट डीजी जे. एस. रावत ने इस पूरे घटनाक्रम पर कहा कि यह अचानक हुआ ऑपरेशनल फेल्योर नहीं लगता, क्योंकि न तो किसी तकनीकी खराबी की पुष्टि हुई और न ही पायलटों की हड़ताल जैसी स्थिति सामने आई। उनके अनुसार, यह संकट तैयारी की कमी और नियमों के सही तरीके से लागू न होने का नतीजा है।
उन्होंने एकाधिकार के सवाल पर कहा कि इंडिगो का विस्तार बाजार की मांग और बेहतर नीतियों के कारण हुआ है, न कि किसी एकाधिकार की वजह से। हालांकि, बढ़ती आबादी और यात्रियों की संख्या को देखते हुए देश में और एयरलाइंस की जरूरत जरूर है। किरायों में अचानक बढ़ोतरी को उन्होंने डिमांड आधारित प्रणाली से जोड़ा और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रचलित है।
रावत ने साफ कहा कि सबसे बड़ी जरूरत यात्रियों के हितों की सुरक्षा की है। मौजूदा कानून न तो पर्याप्त हैं और न ही उनका सही से पालन हो पा रहा है। एयरलाइंस को पैसेंजर फ्रेंडली बनना होगा और DGCA को भी उद्योग के विस्तार के साथ अपनी निगरानी क्षमता बढ़ानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे संकट दोबारा न हों।





